पाकिस्तान को लेकर बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर, कहा- "निरंतर बातचीत का युग समाप्त"
दिल्ली में राजदूत राजीव सीकरी की नई किताब के विमोचन के अवसर पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने देश की विदेश नीति पर बात की। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका, मालदीव समेत कई अन्य पड़ोसी देशों का जिक्र किया।
नई दिल्ली : दिल्ली में राजदूत राजीव सीकरी की नई किताब के विमोचन के अवसर पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने देश की विदेश नीति पर बात की। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका, मालदीव समेत कई अन्य पड़ोसी देशों का जिक्र किया। बता दें कि शुक्रवार को राजदूत राजीव सीकरी की किताब 'स्ट्रेटेजिक कॉनड्रम्स: रीशेपिंग इंडियाज फॉरेन पॉलिसी' का विमोचन किया गया।
पड़ोसी देशों की बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया के हर देश के लिए पड़ोसी देश एक समस्या ही है। अगर देखा जाए तो कोई देश ऐसा नहीं है, जिसकी उनके पड़ोसी देश के साथ समस्याएं नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को लेकर कहा कि उनके साथ निर्बाध बातचीत का दौर 'खत्म' हो गया है।
हर काम के नतीजे होते हैं- एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान के बारे में और बात करते हुए कहा कि "मुझे लगता है कि पाकिस्तान के साथ निर्बाध बातचीत का दौर खत्म हो चुका है। हर काम के नतीजे होते हैं। जहां तक जम्मू-कश्मीर का सवाल है, मुझे लगता है कि अनुच्छेद 370 खत्म हो गया है। इसलिए, अब मुद्दा यह है कि हम लोग पाकिस्तान के साथ किस तरह के रिश्ते की कल्पना कर सकते हैं?"
राजदूत राजीव सीकरी कि किताब की बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि "राजीव ने सुझाव दिया है कि शायद भारत पड़ोसी देश के साथ मौजूदा स्तर के संबंधों को जारी रखने से संतुष्ट है। इसके साथ ही चाहे घटनाएं सकारात्मक या नकारात्मक दिशा लें, हम सभी पर प्रतिक्रिया देंगे।"
'विरासत में मिली समझदारी' से भ्रमित नहीं- एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान की बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि "जहां तक अफगानिस्तान का सवाल है, सामाजिक स्तर पर वो भारत के लिए एक निश्चित सद्भावना है। लेकिन अफगानिस्तान को देखते हुए, मुझे लगता है कि हमे शासन कला की बुनियादी बातों को नहीं भूलना चाहिए। यहां अंतरराष्ट्रीय संबंध काम कर रहे हैं।
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि "इसलिए जब हम आज अपनी अफगान नीति की समीक्षा करते हैं, तो मुझे लगता है कि हम अपने हितों के बारे में बहुत स्पष्ट हैं। हम अपने सामने मौजूद 'विरासत में मिली बुद्धि' से भ्रमित नहीं हैं। अमेरिकी सेना की मौजूदगी वाला अफगानिस्तान अमेरिका की मौजूदगी के बिना वाले अफगानिस्तान बिलकुल अलग है। "
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